सोमवार, 28 सितंबर 2009

Antarvasna Email Club Message

प्रिय मित्रो !

"तनु- मेरा पहला प्यार "

आज अन्तर्वासना के कथा-भण्डार से आपके लिए प्रस्तुत है राज पाल सिंह द्वारा प्रेषित कहानी !

कहानी में लेखक ने बताया कि कैसे उसने अपनी हम-उम्र पड़ोसन तनु के कमसिन बदन का लुत्फ़ लिया !

गुरूजी

हिन्दी सेक्स फ़ोरम ! www.antarvasna.com/forum/

*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*- "तनु- मेरा पहला प्यार " -*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*


मेरा नाम राज है। मैं गुड़गांव (हरियाणा- दिल्ली के पास) का रहने वाला हूँ। मेरी उमर 37 साल है। मेरी शादी को लगभग 12 साल हो गए। मेरा एक बेटा है जो लगभग दस साल का है। वो देहरादून बोर्डिग स्कूल में पढ़ता है। मैंने बी.एस सी. (बायो) और फिर बी. फ़ार्मेसी किया।

इस लम्बी पढ़ाई और कालेज की जिन्दगी के दौरान कई लड़कियाँ मेरी जिंदगी में आई। कई लड़कियॉ मेरी खास गर्लफ्रैंडस बनी। मैने अपनी कालेज लाईफ में अपनी कई गर्लफ्रैंडस के साथ सैक्स के मज़े लिए।

सबसे पहले तनु मेरी जिंदगी में आई। फिर नीता, फिर रेनु, चाँद, नीना, शैलजा, कल्पना, मिनी, लीनू, रेखा और आखिर में सुमिता मेरी जिंदगी में आई। इन सभी के साथ में मैने किसी के साथ एक बार, किसी के साथ दो बार तथा मिनी के साथ सबसे जयादा 19 बार सैक्स किया। बड़े मजे के दिन थे वो।

फिर 12 साल पहले शादी हो गई। शादी के बाद लगभग आठ साल तक अपनी पत्नी के साथ सैक्स का आनन्द लिया। लगभग 4 साल पहले मेरी वाईफ के गर्भाशय को बीमारी के कारण निकालना पडा। इसके बाद सैक्स में उसकी रुचि लगभग खत्म हो गई। इसलिये हम महीने में लगभग एक या दो बार सैक्स करते।

अब मेरी पत्नी ने लगभग तीन साल से बुटीक का काम शुरु कर रखा है। वो सारा दिन उसमें व्यस्त रहती है। शाम को लेट हो जाती है और काफी थकी भी होती है। इसलिये अब हम महीने में लगभग मुश्किल से एक बार ही सैक्स कर पाते हैं। खैर छोड़िये………।

शादी के बाद भी कुछ लड़कियाँ मेरी जिंदगी में आई जिनके साथ मैंने सैक्स किया। सबसे पहले मेरी साली रजनी उर्फ "बेबो" मेरी जिंदगी में आई। फिर मेरे पड़ोस की प्रिया, फिर मेरे दोस्त देवेन्द्र की दोस्त पायल और आखिर में मेरी पत्नी की सहेली ………… उसका नाम मैं अभी नहीं बताउंगा क्योंकि उससे मेरा रोमांस अभी चल रहा हैं, मेरी जिंदगी में आई। इन सभी के साथ में मैंने कई बार सैक्स किया हैं।

इनमें से मैने अपनी साली रजनी उर्फ "बेबो" के साथ सबसे जयादा 17 बार सैक्स किया। हर एक के साथ सैक्स की अपनी अलग और एक मजेदार कहानी हैं। काश स्टिरियो की तरह से जिंदगी में भी रिवाइन्ड बटन होता तो मैं इन कहानियों को फिर से रिवाइन्ड करके देखता और आप लोगों को भी बताता। पर ऐसा नहीं हो सकता। इसलिये मैं अपनी कुछ खास घटनाएं आपके साथ बांट रहा हूँ।

छुट्टी वाले दिन पत्नी तथा बेटे के ना होने की वजह से मैं जब भी फ्री होता हूँ तो इंटरनेट से गर्म और सेक्सी चित्र, अंग्रेज़ी और हिन्दी की कहानियाँ डाऊनलोड करता हूँ और अन्तर्वासना हिंदी कहानियाँ जरूर पढ़ता और डाऊनलोड करता हूँ।

आज मेरे पास ऐसे चित्रों तथा ऐसी कहानियों का बहुत बड़ा संग्रह है। अन्तर्वासना की ज्यादातर कहानियां बहुत अच्छी तथा दिल को छू लेने वाली और अपनी सी लगती हैं। इन्हीं सब कहानियों से प्रेरणा पाकर मैं भी अपनी कुछ कहानियां लिख रहा हूँ। ये सारी कहानियां बिल्कुल सच्ची हैं, आप मानो या न मानो। खैर ……

अब मैं आपको अपनी पहली सच्ची कहानी बताने जा रहा हूं। जल्दी ही और भी कहानियाँ आपके सामने आने वाली हैं। तो मज़े लो दोस्तो, पर पढ़ने के बाद मुझे मेल जरूर करना।

मेरे माता-पिता दोनों टीचर थे। मेरी एक बड़ी बहन है। लगभग 18 साल तक किराए के मकान में रहने के बाद मम्मी-पापा ने सैक्टर में मकान बना लिया।

जब हम उस मकान में गए तब मेरी उमर लगभग 18 साल थी। मैं ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता था। मेरा मकान उन दिनो में शहर के सबसे अच्छे सैक्टर में था। कार्नर का मकान था। मुझे बचपन से सैक्सी किताबें पढ़ने तथा सैक्सी तस्वीरें व पोस्टर देखने का बड़ा शौक था। इसी वजह से मैं वक्त से पहले ही सैक्स के बारे में सब कुछ जान गया था।

मेरे अगले तथा साथ वाले मकान में तनु अपने माता-पिता और एक छोटे भाई के साथ रहती थी। तनु के पिता मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी थे। तनु भी मेरी तरह ग्यारहवीं क्लास में मगर किसी दूसरे स्कूल में पढ़ती थी। वो थोड़े लम्बे कद की, पतले और नाजुक जिस्म की तथा बड़े-बड़े स्तनों वाली बहुत सुंदर लड़की थी। मुझे उससे पहली ही नजर में प्यार हो गया था।

पड़ोस का मकान होने की वजह से हम अकसर रोज ही मिलते तथा बात करते थे। मैं और तनु कभी-कभी किताबें या नोट्स लेने के बहाने एक-दूसरे के घर आने-जाने लगे।

एक दिन तनु अपने गेट पर खड़ी होकर अपनी सहेली नीता से बात कर रही थी। वो दोनों कुछ अजीब सी बातें कर रही थी। फिर एक में तीन, एक में जीरो कह कर हंसने लगी।
तनु की सहेली के जाने के बाद मैंने तनु से पूछा- एक में तीन, एक में जीरो क मतलब क्या था?

तनु ने नहीं बताया। मेरे काफी जिद्द करने के बाद उसने बताया कि लड़कियों के नीचे से महीने में दो-तीन दिन खून निकलता है। एक में तीन एक में जीरो का मतलब कल तो तीन बार खून निकला था। मगर आज एक बार भी नहीं निकला।

मैं समझ गया कि वो मासिक-धर्म के बारे में बात कर रही थी क्योंकि मैंने इस बारे में पढ़ा और दोस्तो से सुना था। फिर भी मैंने अनजान बन कर तनु से पूछा- ऐसा क्यों होता है?

तनु बताना नही चाहती थी मगर मेरे काफी जिद्द करने के बाद उसने बताया कि जब लड़कियाँ जवान होती हैं तो लड़कियों के नीचे से हर महीने में दो-तीन दिन खून निकलता है। फिर वो अपने आप बन्द हो जाता है। इसका मतलब अब लडकी माँ बन सकती है।

मैंने फिर अनजान बन कर तनु से पुछा कि ऐसा कैसे होता है? लडकी माँ कैसे बन सकती है?

तनु बताना नही चाहती थी मगर एक बार फिर मेरे काफी जिद्द करने के बाद उसने बताया कि जब लड़के और लड़कियों का मिलन होता है तो लडकी गर्भवती हो जाती है और उसके खून निकलना बन्द हो जाता है। फिर नौ महीने बाद बच्चा हो जाता है।

मैंने फिर अनजान बन कर तनु से पूछा कि लड़के और लड़कियों का मिलन कैसे होता है।

एक बार फिर मेरे काफी जिद्द करने के बाद तनु ने बताया कि जब लड़का अपने लिन्ग को लड़की की योनि के अन्दर डाल कर आगे-पीछे करता है। फिर उसके लिंग से शुक्राणु लड़की की योनि के अन्दर गिर जाते हैं और उससे लड़की गर्भवती हो जाती है।

मैंने इसी तरह से बहुत सी बातें तनु से पूछी और उसने बताई भी। फिर मैंने उससे पूछा कि उसे ये सब कैसे पता चला। तो उसने बताया कि उसके ताऊ जी की लड़की की शादी कुछ दिन पहले ही हुई है। उसी ने उसे ये सब कुछ बताया है।

इस तरह मैं और तनु काफी खुल गये थे। अब मैं अकसर उससे सैक्स की बातें करने लगा। फिर धीरे-धीरे उसको छेड़ने लगा। फिर हमारी छेड़-छाड़ चूमने तक, फिर होंठों पर होंठ का चुम्बन और आखिर में एक-दूसरे के अँगो को चूने, हाथ फिराने और दबाने तक पहुँच गई।

हम जब भी एकांत में होते तो एक-दूसरे से लिपट कर किस करते। मैं हाथों से तनु के बड़े-बड़े स्तन दबाता और वो हाथों से मेरा लण्ड दबाती। हम दोनों को ऐसा करना बहुत अच्छा लगता था। एक बार हम दोनों एक-दूसरे से लिपट कर होंठों का प्रगाढ़ चुम्बन कर रहे थे।

मैं किस करते-करते अपने हाथों से तनु के कुरते के ऊपर से उसके बड़े-बड़े स्तन दबा रहा था और वो अपने हाथों से पैंट के ऊपर से मेरा लण्ड पकड़ कर दबा रही थी। मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया। मैने पैंट की जिप खोल कर अपना लण्ड बाहर तनु के हाथ में पकड़ा दिया। तनु ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। मेरा लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था।

तनु मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर उपर-नीचे और आगे-पीछे करने लगी। मैंने तनु की सलवार के अन्दर हाथ डाल दिया। फिर मैं उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। फिर कुछ देर बाद मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और ऊपर से ही रगड़ने लगा।

फिर मैं तनु की चूत पर हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगलियाँ तनु की चूत के अन्दर डाल दी। फिर उंगलियों से तनु की चूत के फाँको में डाल कर रगड़ने लगा। लगभग 5-7 मिनट बाद तनु की चूत से कुछ बहुत चिकना सा निकलने लगा।

इतने में मेरी बहन कालेज से आ गई और हम अलग हो गये। हम सोफे पर आ कर बैठ गये। मेरा लण्ड अभी तक खड़ा था, इसलिए मैं उसे अपनी टांगों के बीच में दबा कर बैठ गया। खैर उस दिन हम बच गये। लेकिन तनु की की चूत से जो कुछ बहुत चिकना सा निकला था, उसकी वजह से मैं उसे चिकनी-चिकनी कह कर चिड़ाने लगा।

इस तरह हम दोनों काफी खुल गऐ थे और एकांत में अकसर ही ये सब करने लगे थे। हमें अकसर ही मौका भी मिल जाता क्योंकि मेरे मम्मी-पापा नौकरी से तथा बहन कालेज से शाम को 5-6 बजे तक आते थे। जबकि मैं और तनु दोनो ही लगभग 2 बजे स्कूल से आ जाते थे।

फिर तनु मेरे यहाँ ह्फ्ते में दो-तीन बार बुक्स य नोटस लेने के बहाने से आ जाती और हम एक-दूसरे को बाँहो में भर कर खूब प्यार करते। हाँ, सैक्स नहीं किया क्योंकि हमें कभी भी दो-तीन घंटे या ज्यादा समय नहीं मिला। बस एक दिन ऐसा समय मिला और उस ही दिन सब कुछ हो गया।

तनु की मेरी बहन से बहुत अच्छी दोस्ती हो ग़ई थी। शाम को अकसर तनु हमारे घर आ जाती। फिर वो और मेरी बहन दोनों पार्क में घूमने चले जाते। हमारा परीक्षा परिणाम आ गया। हम दोनो बहुत अच्छे नम्बरों से पास हो गए। बारहवीं में बोर्ड के पेपर होने थे। इसलिए पापा कहीं बाहर नहीं जाने देते थे। बस घर में रहो और पढ़ते रहो। मम्मी-पापा मार्केट भी अकेले जाते और हम दोनों भाई-बहन को घर ही छोड़ जाते।

एक दिन शाम को तनु घर आई तो मैं घर में अकेला था। मेरी बहन और मम्मी-पापा मार्केट गए थे। हम दोनों ड्राइंगरूम में बैठ कर बातें करने लगे। हमने कुछ देर बातचीत की। फिर तनु घर जाने के लिये खड़ी हो गई।

मैंने उससे कहा,"थोड़ी देर और रुकोगी नहीं? प्लीज़, कुछ देर और रुको ना।"

वो रुकी नहीं और जाने लगी। मैने उसका हाथ पकड़ लिया। वो अपना हाथ छुड़ाने लगी। मैंने उसे धकेल कर दीवार से सटा दिया और उसके माथे को चूमा। फिर उसके गालों को चूमने लगा। तनु के सर के पीछे स्विच-बोर्ड था। अचानक उसका सर स्विच पर लगा और लाईट बन्द हो गई। तनु एकदम अन्धेरा होने से डर गई और मुझसे लिपट गई।

मैंने उसे अपने सीने से चिपका लिया। मैंने अपने हाथो में तनु का चेहरा थाम लिया और फिर मैंने अपने जलते हुए होंठ तनु के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा।

तनु ने भी मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मैं तनु को किस करते-करते मै उस के बालों में हाथ फिराने लगा, उसके गालों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसकी टी-शर्ट के ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। कुछ देर बाद मैं उसकी टी-शर्ट के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके वक्ष को दबाने लगा और उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा।

तनु बोली "क्या करते हो? दीदी और अंकल-आन्टी आने वाले होंगे।"

मैंने कहा,"चिंता मत करो। वो सब दो-तीन घंटे तक नही आँएंगे और जब आएँगे तो गाड़ी का हॉर्न बजा कर सामान ले जाने के लिये मुझे बुलाएँगे। जब मै सामान लेने जाउँगा तब तुम कपड़े पहन कर पिछ्ले दरवाजे से घर चली जाना। किसी को पता भी नही चलेगा।"

हमारा मकान कॉर्नर का है, जिसका पिछला दरवाजा पीछे गली में खुलता है। तनु यह बात जानती थी। इसलिये वो कुछ नहीं बोली।

मैंने मुख्य दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर मैं तनु का हाथ पकड़ कर उसे बेडरूम में ले आया और बेडरूम की फुट-लाईट जला दी। कमरा धीमी लाल रौशनी से भर गया। मैंने तनु को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा।

तनु ने भी मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ तनु के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैने तनु को बैड पर लिटा दिया। फिर उसकी बगल में लेट कर उसके गालों को चूमने लगा। फिर मैंने तनु की टी-शर्ट ऊपर करके उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुऐ होंठ रख दिए और उसके नरम-नरम, गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों से चूमने लगा। तनु के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी।

मैं उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा तो तनु ने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उसकी टी-शर्ट उतार कर बैड पर फैंक दी। तनु के बड़े-बड़े ओर गोरे-गोरे स्तन सफेद ब्रा में फँसे थे। मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। तनु ने अपनी आंखें बंद कर ली। फिर मैं उसकी ब्रा के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी सख्त हो चुकी चूचियों को दबाने लगा।

कुछ देर बाद मै उसकी ब्रा के हुक खोल कर उसकी नंगी पीठ पर हाथ फिराने लगा। फ़िर मैंने उसकी ब्रा भी उसके तन से जुदा कर दी और दोनो कबूतरों को आज़ाद कर दिया और उन्हें पकड़ कर मसलने लगा। साथ-साथ उसके गुलाबी चूचुकों को हल्के-हल्के मसलने लगा।

फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे स्तनों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। फिर मैं उसके पेट पर हाथ फिराते हुऐ उसकी लोअर के अन्दर ले गया और उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा। फिर कुछ देर तक उसकी चूत पर हाथ फेरने के बाद मैं अपनी हथेली से उसकी चूत को दबाने लगा। वो बहुत गरम हो चुकी थी और मेरे सर पर हाथ फेर रही थी, अपने होंठ चूस रही थी।

फिर मैं उसके लोअर को खींच कर उतारने लगा।

तनु बोली "प्लीज़ ! इसे मत उतारो। कोई आ जाएगा।"

मैंने कहा "ओफोह तनु, चिंता मत करो, कोई नही आँएंगा।"

तनु बोली "प्लीज़ ! मुझे डर लगता है।"

मैंने कहा "प्लीज़ ! तनु डरने की क्या बात है। मेरे होते हुऐ तुम चिंता मत करो। कोई नही आँएंगा। मैं तुम्हें प्यार करता हूँ ! बहुत प्यार करता हूँ ! तुम मेरी हो ! प्लीज़ ! मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ ! प्लीज़ ! तनु, मैं आज तुम्हें अपने सामने नंगी देखना चाहता हूँ ! प्लीज़ !"

तनु यह बात सुनकर कुछ नही बोली। मैं फिर उसके लोअर को उतारने लगा। अब तनु ने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उसका लोअर उतार कर फेंक दिया। तनु ने लाल पैन्टी पहनी हुई थी। फिर मैंने अपने भी सारे कपड़े उतार दिये और सिर्फ चड्डी में तनु से लिपट गया।

फिर मैं उसकी पैन्टी के उपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। तनु ने अपनी आंखे बंद कर रखी थी। फिर मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर बाद मै उसकी पैन्टी को खींच कर उतारने लगा।

तनु बोली "क्या कर रहे हो। प्लीज़ ! इसे मत उतारो। कोई आ जाएगा। मुझे शरम आ रही है।"

मैंने कहा "अपनी आँखें बन्द कर लो। नहीं आएगी।"

तनु बोली "प्लीज़ ! इसे मत उतारो। मुझे डर लगता है।"

मैंने कहा "प्लीज़ ! तनु डरने की क्या बात है।"

तनु बोली "प्लीज़ ! राज़, मैं भी तुम्हें प्यार करती हूं लेकिन यह ठीक नहीँ है ! प्लीज़ ! इसे मत उतारो। मुझे बहुत ही गलत लग रहा है।"

मैंने कहा "प्लीज़ ! तनु, इसमें कुछ गलत नहीं है। प्यार में कुछ गलत नहीं होता। प्लीज़ ! तुम अपनी आँखें बन्द कर लो और मुझ पर भरोसा रखो।"

तनु बोली "प्लीज़ ! मुझे डर लगता है।"

मैंने कहा "प्लीज़ ! तनु कुछ करेंगे नही। बस कपड़े उतार कर नंगे एक दूसरे से लिपट कर लेटेंगे और खूब प्यार करेंगें।"

यह कह कर मैंने लगभग जबरदस्ती ही उसकी पैन्टी उतार दी। तनु का नंगा बदन लाल रोशनी में नहाकर लाल हो गया।

मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और चड्डी फाड़ कर बाहर आने को हो रहा था। मैंने चड्डी उतार कर फेंक दी और मैं तनु से लिपट गया। मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया और एक हाथ उसके वक्ष पर रख कर उसे दबाने लगा।

वो और गरम होने लगी थी। फिर मैंने तनु को अपने साथ सटा कर लिटा लिया। मेरा लण्ड तन कर तनु की चिकनी टांगों से टकरा रहा था। मैं तनु की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा। वो सिस्कारियां लेने लगी।

मौके की नज़ाकत को समझते हुए मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और ऊपर से ही रगड़ने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगली तनु की चूत के अन्दर डाल दी। फिर उंगलियों से तनु की चूत के फाँको को खोलने और बन्द करने लगा।

इस कहानी का दूसरा भाग अन्तर्वासना पर शीघ्र प्रकाशित होगा !

ऐसी ही और इससे भी ज्यादा उत्तेजक बहुत सी नई नई कहानियाँ आप हर रोज पा सकते हैं www.antarvasna.com पर !

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सोमवार, 21 सितंबर 2009

Antarvasna Email Club Message

प्रिय मित्रो !

"सखी रे सखी"

आज अन्तर्वासना के कथा-भण्डार से आपके लिए प्रस्तुत है रीता शर्मा द्वारा प्रेषित कहानी !

कहानी में लेखिका ने बताया कि कैसे उसकी सहेली कोमल ने अपने मित्र विकास से काम-पीड़ा से त्रस्त लेखिका की प्यास बुझवाई।

गुरूजी

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*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*- "सखी रे सखी" -*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*


यह कहानी दो सखियों की है। दोनों आपस में बहुत ही प्यार करती थी, यूं कहिये कि जान छिड़कती थी। ये दो सखियां है रीता शर्मा और कोमल सक्सेना। साथ साथ ही कॉलेज में पढ़ी, आपस में एक दूसरे की राजदार रही थी। रीता की शादी उसके ग्रेजुएट होते ही हो गई थी। दोनों ने पोस्ट ग्रेजुएट करने बाद एक प्राईवेट फ़र्म में नौकरी कर ली थी। पर रीता के पति राकेश को ये अच्छा नहीं लगा तो उसने नौकरी छोड़ दी थी।

उसकी किस्मत ने जैसे पल्टी खाई, राकेश को कुवैत में अच्छा काम मिल गया, वो जल्दी ही वहाँ चला गया। रीता ने कोमल को अपने साथ रहने के लिये बुला लिया। हालांकि कोमल अकेली रहना पसन्द करती थी, क्योंकि उसके विकास और उसके दोस्त समीर से शारीरिक सम्बन्ध थे। रीता को ये सब मालूम था पर उसने अपने प्यार का वास्ता दे कर कोमल को अपने घर में रहने के लिये राजी कर लिया।

रीता ने अपने घर में सामने वाला कमरा दे दिया। विकास और समीर ने कोमल को कमरा बदलने में बहुत सहायता की। पर शायद कोमल को नहीं पता था कि विकास और समीर की वासना भी नजरे रीता पर गड़ चुकी है। कोमल की ही तरह रीता भी दुबली पतली थी, तीखे मयन नक्शे वाली थी, बस शादी के बाद उसने साड़ी पहनना आरम्भ कर दिया था।

चुदाई का अनुभव कोमल को रीता से बहुत अधिक था, वो हर तरह से अपनी वासना शान्त करना जानती थी। इसके विपरीत रीता शादी के बाद कुंए के मेंढक की तरह हो गई थी। चुदाने के नाम पर पर बस वो अपना पेटीकोट ऊपर उठा कर राकेश का लण्ड ले लेती थी और दो चार धक्के खा कर, झड़ती या नहीं भी झड़ती, बस सो जाया करती थी। झड़ने का सुख रीता के नसीब में जैसे बहुत कम था।

आज राकेश को कुवैत गये हुये लगभग दो साल हो गये थे, हां बीच बीच में वो यहा आकर अपना वीसा वगैरह का काम करता था और जल्दी ही वापस चला जाता था।

पर आज रीता को देख कर कोमल को बहुत खराब लगा। बर्तन धोना, कपड़े धोना, खाना बनाना ही उसका काम रह गया था।

आज वो नल पर कपड़े धो रही थी। उसने सिर्फ़ पेटीकोट और एक ढीला ढाला सा ब्लाऊज पहन रखा था। उसके दोनों चूंचियाँ ब्लाऊज में से हिलती जा रही थी और बाहर से स्पष्ट नजर आ रही थी। उसके अस्त व्यस्त कपड़े, उलझे हुये बाल देख कर कोमल को बहुत दुख हुआ। विकास तो अक्सर कहता था कि इस भरी जवानी में इसका यह हाल है तो आगे क्या होगा ... इसे सम्भालना होगा ... ।


फिर एक दिन कोमल ने देखा कि रीता अपने बिस्तर पर लेटी करवटें बदल रही थी। उसका एक हाथ चूत पर था और एक अपनी चूंचियों पर ... । शायद वो अपनी चूत घिस घिस कर पानी निकालना चाह रही थी। उसे देख कर कोमल का दिल भर आया। वो चुपचाप अपने कमरे में आ गई। फिर आगे भी उसने अपने कमरे के दरवाजे के छेद में से देखा, रीता ने अपना पेटीकोट ऊपर उठा रखा था और अंगुली अपनी चूत में डाल कर हस्त मैथुन कर रही थी।

शाम को कोमल ने हिम्मत करके रीता को बहुत ही अपनेपन से कह दिया,"मेरी प्यारी सखी ... बोल री तुझे क्या दुख है?"

"मेरी कोमल, कुछ दिनों से मेरा मन, भटक रहा है ... और ये सब तेरे विकास का किया हुआ है !"

"नहीं रे, वो तो भोला भाला पंछी है ... मेरे जाल में उलझ कर फ़ड़फ़ड़ा रहा है ... वो कुछ नहीं कर सकता है ...!"

"सच है री सखी ... उसकी कामदेव सी निगाहों ने मुझे घायल कर दिया है ... उसका शरीर मुझे किसी काम देवता से कम नहीं लगता है ... मेरे तन में उसे देख कर अग्नि जल उठती है, तन मन राख हुआ जा रहा है !" रीता की आहों में वासना का पुट स्पष्ट उभर कर कर आ रहा था, स्वर में विनती थी।

"सखी रे सखी ... तुझे उसका काम देव जैसा लिंग चाहिये अथवा उसकी प्रीति की भी चाह है?" रीता की तड़प और आसक्ति देख उसका मन पिघल उठा।

"ना रे सखी ... तेरी दया नहीं ... उसका प्यार चाहिये ... दिल से प्यार ... हाय रे ...!" उसका अहम जाग उठा।

कोमल ने अपना तरीका बदला,"सखी ... तू उसे अपने जाल में चाहे जैसे फ़ंसा ले ... और तन की जलन पर शीतल जल डाल ले ... तब तक मुझे ही अपना विकास समझ ले !" कोमल के मन में रीता के लिये कोमल भावनाएँ उमड़ने लगी ... उसे समझ में आ गया कि ये बेचारी अपने छोटे से जहाँ में रहती है, पर कितनी देर तक तड़पती रहेगी।

रीता भी अपनापन और प्रीति पा कर भावना से अभिभूत हो गई और कोमल के तन से लता की तरह लिपट पड़ी, और कोमल के गुलाबी गालों पर मधुर चुम्बनो की वर्षा कर दी।
कोमल ने उसकी भावनाओं को समझते हुए रीता के होंठ चूम लिये और चूमती ही गई। रीता के मन में कुछ कुछ होने लगा ... जैसे बाग की कलियाँ चटकने लग गई। उसकी चूंचियाँ कोमल की चूंचियों से टकरा उठी ... और मन में एक मीठी टीस उठने लगी। उसे अपनी जीवन की बगिया में जैसे बहार आने का अहसास होने लगा।

"कोमल, मेरे मन में जैसे कलियाँ खिल रही हैं ... मन में मधुर संगीत गूंज रहा है ... मेरे अंगो में मीठी सी गुदगुदी हो रही है ... ! " रीता के होंठो से गीलापन छलक उठा। कोमल के भी अधर भीग कर कंपकंपाने लगे। अधरों का रसपान होने लगा। जैसे अधरों का रसपान नहीं, शहद पी रहे हों। फिर जैसे दोनों होश में आने लगे। एक दूसरे से दोनों अलग हो गईं।

"हाय कोमल, मैं यह क्या करने लगी थी ... " रीता संकुचा उठी ... और शर्म से मुख छिपा लिया।

"रीता, निकल जाने दे मन की भावनाएँ ... मुझे पता है ... अब समय आ गया है तेरी प्यास बुझाने का !"

"सुन कोमल, मैंने तुझे और विकास को आपस में क्रीड़ा-लीन देखा ...तो मेरे मन विचलित हो गया था !" रीता ने अपनी मन की गांठें खोल दी।

"इसीलिये तू अपने कमरे में हस्तमैथुन कर रही थी ... अब सुन री सखी, शाम को नहा धो कर अपन दोनों आगे पीछे से अन्दर की पूरी सफ़ाई कर के कामदेव की पूजा करेंगे ... और मन की पवित्र भावनाएँ पूरी करेंगे ...! " कोमल ने एक दूसरे के जिस्म से खेलने का निमंत्रण दिया।

"मेरी कोमल ... मेरी प्यारी सखी ... मेरे मन को तुझ से अच्छा कौन जान सकता है? मेरा प्यारा विकास कब मुझे प्यार करेगा ? ... हाय रे !" रीता ने निमंत्रण स्वीकार करते हुये उसे प्यार कर लिया। मैने मोबाईल पर विकास को समझा दिया था ... कि उसके प्यारे लण्ड को रीता की प्यारी चूत मिलने वाली है।

संध्या का समय हो चला था। सूर्य देवता अपने घर की ओर जा रहे थे।

कहीं कोने में छुपा अंधकार सारे जहां को निगलने का इन्तज़ार कर रहा था। शैतानी ताकतें अंधेरे की राह ताक रही थी। जैसे ही सूर्य देवता का कदम अपने घर में पड़ा और रोशनी गायब होने लगी, शैतान ने अपने आप को आज़ाद किया और सारे जहाँ को अपने शिकंजे में कसने लगा।

सभी के मन में पाप उभर आये। एक वासना भरी पीड़ा उभरने लगी। कामदेव ने अपना जादू चलाया।

इन्सान के अन्दर का पागलपन उमड़ने लगा। सभी औरतें, लड़कियाँ भोग्य वस्तु लगने लगी। मासूम से दिखने वाले युवक, जवान लड़कियों को कामुक लगने लगे ... उनकी नजरें उनके बदन पर आकर ठहर गई। मर्दों का लिंग उन्हें कड़ा और खड़ा दिखने लगा। इधर ये दोनों सखियां भी इस सबसे अछूती नहीं रही। कोमल और रीता भी नहा धोकर, पूर्ण रूप से स्वच्छ हो कर आ गई।

दोनों जवानियाँ कामदेव का शिकार बन चुकी थी। दोनों की योनि जैसे आग उगल रही थी। शरीर जैसे काम की आग में सभी कुछ समेटने को आतुर था। कमरे को भली भांति से बंद कर दिया। दोनों ने अपनी बाहें फ़ैला दी ... कपड़े उतरने लगे ... चूंचियाँ कड़क उठी, स्तनाग्र कठोर हो कर इतराने लगे। कोमल नंगी हो कर बिस्तर पर दीवार के सहारे पांव लम्बे करके बैठ गई और नंगी रीता को उसने अपनी जांघों पर उल्टा लेटा लिया।

रीता के चूतड़ों को कोमल ने बिल्कुल अपने पेट से सटा लिया और उसके चूतड़ो को सहलाने लगी और थपथपाने लगी। रीता ने आनन्द के मारे अपनी दोनों टांगें फ़ैला दी और अपने प्यारे गोल गोल चूतड़ों की फ़ांकें खोल दी। कोमल रीता की गाण्ड को सहलाते हुये कभी उसके दरारों के बीच सुन्दर से भूरे रंग के फ़ूल को भी दबा देती थी। हल्के तमाचों से चूतड़ लाल हो गये थे ... थूक लगा लगा कर फ़ूल को मसलती भी जा रही थी।

"कोमल ... हाय अति सुन्दर, अति मोहक ... मेरे पति के साथ इतना सुख कभी नहीं मिला ... " रीता कसकती आवाज में बोली।

"अभी तो कुछ नहीं मेरी सखी, देख ये दुनिया बड़ी रसीली है ... मन को अभी तो जाने क्या क्या भायेगा ... " कोमल ने चूतड़ो के मध्य छेद पर गुदगुदी करते हुये कहा।

कोमल की अंगुलियाँ उसके फ़ूल को दबाते हुये फ़क से भीतर घुस गई। रीता चिहुंक उठी। उसे एक नये अद्वितीय आनन्द की अनुभूति हुई।

दूसरा हाथ उसके सुन्दर और रस भरे स्तनो पर था। उसके कठोर चूचुकों को मसल रहे थे। कोमल की अंगुलियां उसकी मुलायम गाण्ड में जादू का काम कर रही थी। उसकी चूत में एक आनन्द की लहर चलने लगी और वह जैसे मस्ती महसूस करने लगी। उसके चूतड़ों को दबाते हुये अंगुली छेद के अन्दर बाहर होने लगी।

रीता मस्ती के मारे सिसकने लगी। इस तरह उसके पति ने कभी नहीं किया था। उसके मुख से सिसकी निकल पड़ी।

"क्या कर रही है कोमल ... बहुत मजा आ रहा है ... हाय मैं तो गाण्ड से ही झड़ जाऊंगी देखना ... ।" उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी।

अब कोमल अंगुली निकाल कर उसकी गुलाबी चूत में रगड़ने लगी, उसका दाना अंगुलियो के बीच दब गया। रीता वासना की मीठी कसक से भर गई थी।

कोमल ने उसे चौपाया बन जाने को कहा। उसने अपने चूतड़ ऊपर उठा लिये, कोमल का उसके प्यारे गाण्ड के भूरे छेद पर दिल आ गया और उसकी जीभ लपलपाने लगी ... और कुछ देर में उसके छेद पर जीभ फ़िसल रही थी। सफ़ाई के कारण उसमें से भीनी भीनी खुशबू आ रही थी ... उसके मस्त छेद को हाथों से खींच कर खोल लिया और जीभ अन्दर ठेल दी। खुशी के मारे रीता का रोम रोम नाच उठा।

तभी विकास का मिस-कॉल आ गया। कोमल समझ गई कि विकास दरवाजे के बाहर खड़ा है। उसने जल्दी से अपना गाऊन लपेटा और बैठक की तरफ़ चल दी।

"मेरी सखी, अपनी आखे बंद कर ले और सपने देखती रह, बाहर कौन है मैं देख कर आती हूँ" कोमल ने रीता से प्यार भरा आग्रह किया और बाहर बैठक में आ कर मुख्य दरवाजा खोल दिया। विकास तुरन्त अन्दर आ गया ... कोमल ने उसे तिरछी निगाहों से देखा।

"मेरी प्यारी सखी रीता चुदने के लिये तैयार है ... उसे कामदेव का ही इन्तज़ार है ... " कोमल ने वासना भरे स्वर में कहा।

"अरे ये कामदेव कौन है ... उसकी तो मै मां ... ।" विकास ने तैश में आ कर आंखे दिखाई।

"आप हैं ... जो कामदेव का रूप ले कर आये हो ... वो देखो ... उस बाला की प्यारी सी चूत और उभरे हुये चूतड़ो के गोल गोल प्याले ... तुम्हारे मोटे और लम्बे, प्यारे से लिंग राह देखते हुये अधीर हुए जा रहे हैं ... "

"ओये ... अधीर दी माँ दी फ़ुद्दी ... मैंने जी बहुत मुठ मारी है रीता जी के नाम की ... " विकास ने दूर से ही रीता ही हालत देख कर मचल उठा।

"अपने लण्ड को जरा और भड़कने दे ... चोदने में मजा आयेगा ... " कोमल ने हंसते हुये विकास को आंख मारी। कोमल ने विकास को अपनी बाहो में लिया और और उसके लण्ड को दबाने लगी।

"चल रे विकास तू उसे बाद में चोदना, पहले मेरी जवानी का मजा तो ले ले ... चल यही खड़े खड़े लौड़ा लगा कर चोद दे !" कोमल से उत्तेजना और नहीं सही जा रही थी। विकास को भी अपना लण्ड कहीं तो घुसेड़ना ही था।

"चल यार, पहले तेरी फ़ुद्दी मार लूँ, ओह्ह मेरा लण्ड भी तो देख कैसा पैन्ट को फ़ाड़ने पर तुला है !" कोमल ने उसका पैन्ट खोल दिया। उसने भी अपना गाऊन निकाल फ़ेंका। कोमल ने उसका गोरा लण्ड थाम लिया और मुठ मारते हुये विकास को चूमने लगी।

कोमल ने अपनी एक टांग उठा कर पास की कुर्सी पर रख दी और अपनी चूत खोल दी। विकास को समीप खींच कर उसका लौड़ा चूत से भिड़ा दिया। विकास ने अपने चूतड़ो का दबाव उसकी खुली चूत पर डाल दिया और उसका प्यारा लण्ड कोमल ने अपनी चूत में घुसा लिया। अब दोनों ही लिपट पड़े और अपने कमर को एक विशेष अन्दाज में हिलाने लगे, लण्ड ने चूत में घुस कर सुरसुरी करने लगा और उसका मजा दोनों उठाने लगे।

उनके चूतड़ों का हिलना तेज हो गया और कोमल की चूत पनियाने लगी। वैसे ही वो रीता के साथ पहले ही उत्तेजना से भरी हुई थी। कोमल की आंखें मस्ती से बन्द होने लगी और अनन्त सुखमई चुदाई का आनन्द उठाने लगी। अब कोमल के मुख से रुक रुक कर सिसकारियाँ निकलने लगी थी और चूत को जोर जोर से विकास के लण्ड पर मारने लगी थी।

फिर एक लम्बी आह भरते हुए उसने विकास के चूतड़ों को नोच डाला और कोमल का रज निकल पड़ा। अब उसकी टांगे कुर्सी पर से नीचे जमीन पर आ गई थी। कोमल विकास का लण्ड चूत में लिये झड़ रही थी। दोनों लिपटे हुए थे। पर विकास का लण्ड अभी तक उफ़न रहा था, उसे अब रीता चाहिये थी जिसके लिये कोमल ने उसे बुलाया था। कोमल अपनी चुदाई समाप्त करके अन्दर कमरे की ओर बढ़ गई।

कोमल और विकास रीता के पास जाकर खड़े हो गये। रीता वासना की दुनिया में खोई अभी तक ना जाने क्या सोच कर आंखे बंद किये सिसकारियाँ भरे जा रही थी। विकास ने ललचाई निगाहों से रीता के एक एक अंग का रस लिया और अपने हाथ कोमलता से उसके अंगों पर रख दिये।

मर्द के हाथों का स्पर्श स्त्री को दुगना मजा देता है ... रीता को भी मर्द के स्पर्श का अनुभव हुआ और सिसकते हुये बोली,"कोमल, तेरे हाथो में मर्द जैसी खुशबू है ... मेरे अंगों को बस ऐसा ही मस्त मजा दे ... काश तेरे लिंग होता ... सखी रे सखी ... हाय !"

विकास ने उसकी चूत, गाण्ड और चूंचियां मस्ती से दबाई। उसका लण्ड फ़ुफ़कारें मारने लगा। उसे अब बस चूत चाहिए थी ... ।

"तुझे सच्चा लण्ड चाहिए ना ... कामदेव को याद कर और महसूस कर कि तेरी चूत में कामदेव का लण्ड है ... " कोमल ने रीता को चूमते हुये विकास का रास्ता खोला।

"मुझे ! हाय रे सखी, कामदेव का नहीं उस प्यारे से विकास का मदमस्त लौड़ा चाहिये, मेरी इस कमीनी चूत की प्यास बुझाने के लिये !" उसकी कसकती आवाज उसके दिल का हाल कह रही थी।

अपना नाम रीता के मुख से सुनते ही विकास के मुख पर कोमलता जाग उठी, चेहरे पर प्यार का भाव उभर आया। उसने भावना में बह कर अपनी आंखें बंद कर ली, जैसे रीता को सशरीर अपनी नयनों में कैद कर लिया हो। विकास ने एक आह भरते हुये रीता के उभरे हुये गोल गोल चूतड़ो पर प्यार से हाथ फ़ेरा और फिर नीचे झांक कर चूत को देखा और और अपने तन्नाये हुये लण्ड को प्यार से उसके चूत के द्वार पर रख दिया।

लण्ड का मोहक स्पर्श पाते ही जैसे उसकी चूत ने अपना बड़ा सा मुँह खोल दिया और गीली चूत से दो बूंदे प्यार की टपक पड़ी। लण्ड ने चूत पर एक लम्बी रगड़ मारी और द्वार को खोल कर भीतर प्रवेश कर गया। रीता को जैसे एक झटका सा लगा उसने तुरंत आँखें खोल दी और अविश्विसनीय निगाहों से पीछे मुड़ कर देखा ...

अपनी चूत में विकास का लण्ड पा कर जैसे वो पागल सी हो गई। एक झटके से उसने उसका लण्ड बाहर निकाला और लपक कर उससे लिपट गई। दो प्यार के प्यासे दिल मिल गये ... जैसे उनकी दुनिया महक उठी ... जैसे मन मांगी मुराद मिल गई हो ... दोनों ही नंगे थे ... दोनों के शरीर आपस में रगड़ खा रहे थे, दोनों ही जैसे एक दूसरे में समा जाना चाहते थे। रीता को लगा जैसे वो कोई सपना देख रही हो।

"मैं सपना तो नहीं देख रही हूँ ना ... हाय रे विकास ... आप मुझे मिल गये ... अब छोड़ कर नहीं जाना ... " रीता भावना में बहती हुई कहने लगी।

"रीता जी, आप मुझे इताना प्यार करती हैं ... " विकास का मन भी उसके लिये तड़पता सा लगा।

"मेरे विकास, मेरे प्राण ... मेरे दिल के राजा ... बहुत तड़पाया है मुझे ... देख ये प्यासा मन ... ये मनभाता तन ... और ये अंग अंग ... राजा तेरे लिये ही है ... तेरा मन और तन, ये अंग मुझे दे दे ... हाय राम जी ... कोमल ... मेरी प्यारी सखी, तू तो मेरी जान बन गई है रे ..." रीता की तरसती हुई आवाज में जाने कैसी कसक थी, शायद एक प्यासे मन और तन की कसक थी। रीता को विकास ने प्यार से ने नीचे झुका कर अपना लण्ड उसके मुँह में दे दिया।

"रीता, मेरा लण्ड चूसो ... तुम्हारे प्यारे प्यारे अधरों का प्यार मांग रहा है !"

"मैने कभी नहीं चूसा है ... प्लीज नहीं ... "

"मीठी गोली की तरह चूस डालो ... मजा आयेगा !" कोमल ने भी विकास का लण्ड पकड़ कर रीता के मुँह में डालने की कोशिश की।

रीता ने कोमल का हाथ जल्दी से हटा दिया ... "कोमल तुम जाओ अब यहाँ से ... मत छूओ मेरे विकास को ... "

रीता ने विकास का लण्ड अपने मुख में समा लिया और चूसने लगी। कोमल रीता की खुली हुई गाण्ड में अंगुली डाल कर उसे गुदगुदी करने लगी। रीता की परवान चढ़ी हुई वासना को जैसे एक सीढ़ी और मिल गई। वो अपने चूतड़ को हिला हिला कर मेरी अंगुली का मजा लेने लगी।

यह सब आनन्द उसे पहली बार नसीब हो रहा था, सो वह बहुत ही उत्तेजित हो कर अपने कमनीय बदन का बेशर्मी से संचालन करने लगी थी। अब रीता ने लण्ड मुख से बाहर निकाल लिया और विकास से लिपट गई।

"राजा अब नहीं रहा जाता है ... हाय अब अन्दर घुसेड़ दो ना ... " रीता ने वासना भरी सीत्कार भरी।

दोनो ही आंखे बंद किये हुए एक दूसरे में समाने की कोशिश में लग गये ... कि रीता के मुख से आह निकल पड़ी। विकास के लण्ड ने अपनी राह ढूंढ ली थी। प्यासा लण्ड चूत में उतर चुका था। विकास रीता के ऊपर चढ़ चुका था, रीता के दोनों पांव विकास की कमर से लिपट कर जकड़ चुके थे। रीता की चूत अपने आप को ऊपर की उठा कर लण्ड को लील लेना चाह रही थी, और विकास के चूतड़ो का जोर रीता की नरम चूत पर दबाव डाल रहा था।

दोनों ने अपना अपना काम पूरा कर लिया, लण्ड पूरा अन्दर जा चुका था और मीठी मीठी वासना की जलन से विकास का लण्ड रीता की चूत में रस भरी बूंदे भी टपकाता जा रहा था। रीता भी मनपसन्द लण्ड पा कर अपनी चूत का पानी बूंदो के रूप में निकालती जा रही थी।

कोमल ने इन दोनों को प्यार से देखा ... और रीता के चूतड़ों पर हल्के हल्के हाथों से मारने लगी। दोनों एक दूसरे के कोमल अंगो को अपने अन्दर समेटे हुये, प्यार से एक दूसरे को दे रहे थे, कस कस कर चूम रहे रहे थे, रीता के स्तन जैसे मस्त हो कर कुलांचे मार रहे थे, आगे पीछे डोलते जा रहे थे और विकास के हाथो में मसले जा रहे थे।

वो दोनो धीरे धीरे आपस में अपने चूत और लण्ड को आगे पीछे जैसे रगड़ रहे थे, पीस रहे थे ...लण्ड चूत में पूरा घुसा हुआ जैसे गहराई में गर्भाशय के मुख को खोलने की कोशिश कर रहा हो। उसकी पूरी चूत में अन्दर तक मिठास भरी लहर चल रही थी। चूत जैसे लण्ड को अपनी दीवारों से लपेट रही थी और दोनों एक जैसे ना खत्म होने वाले आनन्द में डूब गये थे। दोनों की आंखे बंद थी और इस स्वर्गीय सुख के आनन्द में खोये हुये थे
।

अचानक विकास ने अपनी गाण्ड उठाई और चूत में लण्ड मारना आरम्भ आरम्भ कर दिया। रीता भी अपने प्यारे चूतड़ो को उछालने लगी और लण्ड को अपनी चूत में पूरा समेटने की कोशिश करने लगी। रीता से अब अपना यौवन सम्भाले नहीं सम्भल रहा था ... उसका अंग अंग मदहोशी से चूर हो रहा था।

विकास का लण्ड जैसे फूलता जा रहा था ... उसके जिस्म में कसावट आती जा रही थी। यौवन रस अब चूत द्वार से निकलना चाहता था ... रीता के जबड़े कस गये थे और वासना से उभर आये थे, दांत किटकिटाने लगे थे, चेहरा विकृत होने लगा था, उसने अपनी आंखें बंद कर ली और अब वो एकाएक चीख उठी ... तड़प उठी ...

यौवन रस रिसता हुआ चूत से निकल पड़ा ... उसके जिस्म में लहरे उठने लगी ... रस ने जिस्म का साथ छोड़ दिया और चूत द्वार से बाहर चू पड़ा। जैसे जैसे उसका रस निकलता गया वो शांत होने लगी ...

पर विकास का लौड़ा अभी भी बड़ी ताकत के अन्दर बाहर आ जा रहा था ... उसे भी पता था कि अब उसका लण्ड पिचकारी छोड़ने वाला है। उसने अपना लण्ड चूत से बाहर निकाल लिया और हाथ में लेकर उसे जोर से दबा दिया। उसके मुख से जैसे गुर्राहट सी निकली और वीर्य ने एक तेज उछाल मारी।

कोमल से रहा नहीं गया ... और लण्ड की तरफ़ लपक पड़ी और इसके पहले कि दूसरा उछाल निकलता, विकास का लण्ड कोमल के मुख में था और बाकी का वीर्य कोमल के गले में उतरने लगा ...

रीता निढाल सी चित्त लेटी हुई थी और गहरी सांसें ले रही थी। अब रीता को कोई शिकवा नहीं था ... उसकी चूत चुद चुकी थी और उसे चोदने के लिये एक मोटा और लम्बा लण्ड मिल गया था ... जो उसे भी प्यार करने लगा था।

"विकास, रीता को तुमने इतने प्यार से चोदा ... इसके लिये मैं और रीता आपके बहुत आभारी हैं !" कोमल ने विकास का शुक्रिया अदा किया।

विकास हंस पड़ा,"आभारी ... हा हा हा ... क्या बात है कोमल ... बड़ी फ़ोर्मल हो गई हो ... " विकास की हंसी छूट पड़ी।

"रीता जी बहुत मस्त हो कर चुदाती हैं ... मेरा तो इन्होंने दिल ही चुरा लिया है !" विकास ने प्यार भरी नजरों से रीता को निहारा।

"चुप रहो जी ... तुम तो कोमल के दिल में रहते हो ... मुझे झांसा मत दो !" रीता ने बिस्तर से उठते हुये कहा।

"अरे नहीं रे पगली, ये तो मेरा दोस्त है बस ... ये तो मुझे चोदता है ... प्यार तो तू करती है ना ... बस अपना दिल तू विकास को दे दे और बदले में उसका दिल ले ले !" कोमल ने दोनों को अपना रुख स्पष्ट कर दिया।

रीता और विकास ने एक दूजे को प्यार से देखा और फिर से एक दूसरे से लिपट पड़े और कस कर जकड़ लिया, होंठ से होंठ जुड़ गये, प्यार करने लगे ... जवानी की कसमें खाने लगे ... चांद तारे तोड़ कर लाने का वादा करने लगे ... संग जीने और मरने की कसमें खाने लगे ...

कोमल ने उनके मन की तरंगो को समझा व वहां से खिसकने में ही अपनी भलाई समझी ... ।

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सोमवार, 14 सितंबर 2009

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सोमवार, 7 सितंबर 2009

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रविवार, 30 अगस्त 2009

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सोमवार, 24 अगस्त 2009

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प्रिय मित्रो !

"चूत में भूत"

आज अन्तर्वासना के कथा-भण्डार से आपके लिए प्रस्तुत है उषा एवम् राकेश द्वारा प्रेषित इस कहानी का प्रथम भाग।

इस कहानी में राकेश ने बताया कि कैसे उस ने अपने ही दोस्त की बीवी रोमा, जो अपनी चूत के भूत से परेशान थी, को चोद कर उसे भूत से मुक्ति दिलाई !

फ़िर बाद में रोमा की सहेली सोना की तकलीफ़ कैसे दूर की।

पहले भाग में रोमा से मज़ा !

बाकी की कहानी भी शीघ्र ही अन्तर्वासना पर प्रकाशित होगी।

गुरूजी

हिन्दी सेक्स फ़ोरम ! www.antarvasna.com/forum/

*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*- "चूत में भूत" -*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*


मेरा नाम राकेश है, मैं एक कम्पनी में मैनेजर हूँ।

कुछ दिन पहले अपने ऑफिस के गार्ड रमेश से मेरी दोस्ती हो गई। धीरे धीर हम दोनों बातचीत में काफी खुल गए। मैं अभी कुंवारा हूँ लेकिन १०० से ज्यादा रंडियां चोद चुका हूँ। मेरा लण्ड ८इंच लम्बा और काफी मोटा है। रमेश शादीशुदा है। अक्सर हम लड़कियों की चूत चोदने और गांड मारने की बातें करते थे। मैं और रमेश अब साथ साथ रंडियां चोदने भी जाने लगे थे।

रमेश ने कुछ दिन बाद मुझे बताया कि वो अपने गाँव की ५-६ भाभियाँ चोद चुका है। रमेश ने कहा कि अगर मैं उसके साथ गाँव चलूं तो ३-४ भाभियाँ तो मुझसे भी चुदने को आराम से तैयार हो जाएँगी।

एक दिन बात-बात में उसने बताया कि गाँव में एक सोना नाम की औरत है और उसकी बीबी रोमा की दोस्त है। देखने में सुंदर है लेकिन उसको पटा कर चोदने के उसके सारे प्रयास असफल रहे हैं। मैंने और रमेश ने मिल कर सोना को चोदने की एक योजना बनाई।

हम लोगों ने १५ तारीख को गाँव जाने का फैसला कर लिया। १५ तारीख को १२ बजे हम रमेश के गाँव पहुँच गए। गाँव में रमेश की बीबी और २ बच्चे थे। रमेश की बीबी घूंघट डाले थी। रमेश मेरा परिचय कराते हुए बोला- रोमा ! यह राकेश भाईसाहब हैं। यह हमारे दोस्त और साहब दोनों हैं। इनसे घूंघट करने की जरूरत नहीं है।

रोमा भाभी ने घूंघट हटा दिया और मुस्कराते हुए बोली- भाईसाहब नमस्ते !

मैंने उसकी बीबी रोमा की तरफ देखा वो थोड़ी काली थी लेकिन उसकी चूचियां बहुत बड़ी बड़ी और तनी हुई थीं। ब्लाउज़ के नीचे रोमा कुछ नहीं पहने थी, संतरे बाहर निकलने को बेताब हो रहे थे, चुचूक के उभार बिलकुल साफ़ दिख रहे थे। चूचियों का कुछ हिस्सा ब्लाउज़ से बाहर झाँक रहा था। रोमा का बदन पूरा माल था और चोदने में मज़ा देने वाला था।
नमस्ते करके रोमा चाय बनाने चली गई। थोड़ी देर में रोमा हम लोगों के लिए चाय बना कर ले आई।

रोमा ने जब झुक कर मुझे चाय दी तो उसकी चूचियां पूरी बाहर निकलने लगी। झुकने पर ब्लाउज़ के झरोखों से उसकी चूचियां पूरी नंगी दिख रही थीं। नंगी चूचियां देख कर मेरा लण्ड टनक कर खड़ा हो गया था। रोमा ने देखा कि मैं उसके बूब्स में झांक रहा हूँ तो उसने एक जहरीली सी मुस्कराहट दी। मुझे उसकी मुस्कराहट से लगा कि इसकी चूत चोदी जा सकती है। मैंने मन ही मन रोमा भाभी की चूत चोदने की ठान ली।

मैं, रोमा और रमेश चाय पीते हुए आपस में बातचीत करने लगे। रोमा बहुत बातूनी थी, मुझे वो कुछ चालू सी भी लगी। रमेश ने बातों बातों में रोमा को बताया कि मुझे भूत-प्रेत भगाने में महारत हासिल है।

हम लोग चाय पी रहे थे तभी वहां गाँव की एक औरत आई, रोमा बोली- आओ बसंती आओ ! रमेश आये हुए हैं और यह इनके मित्र राकेश हैं। हम सब लोग बातें करने लगे। कुछ देर बाद रोमा उठकर अंदर किसी काम से चली गई।

रमेश ने मौका देखकर बसंती की चूचियां मेरे सामने ही मसल दी और बोला- बसंती, तेरे को चोदने का मन कर रहा है ! बसंती मुस्करा के बोली- चल खेत में घूमकर आते हैं, गन्ने बहुत बड़े बड़े हो रहे हैं, वहां चुदवाने में बहुत मज़ा आएगा और तेरा केला खाए हुए भी बहुत दिन हो गए हैं।

रमेश मुस्करा दिया और बोला- राकेश भाईसाहब का केला बहुत बड़ा है इनका भी खाए, तो चलें !

बसंती मुस्करा दी और आँख मार कर बोली- दोनों आना ! दोनों के केले खा लूंगी ! और मुस्कराती हुई अंदर चली गई।

बसंती देखने में बुरी नहीं थी लेकिन रोमा भाभी के आगे बेकार थी। मैंने रमेश से कहा- तू २ महीने बाद आया है जा कर जरा भाभी के पास लेट !

रमेश खी-खी कर हँसा और बोला- भाई ! बीबी की तो रात में भी ले लेंगे ! अभी तो चल कर बसंती की चूत बजाते है, साली बड़ी मस्त होकर चुदवाती है और लोड़ा भी लपालप पीती है। घड़ी में एक बज रहा था। रमेश बोला- दो बजे खेत में चल कर बसंती को चोदते है ! उसके बाद ५ बजे सोना आएगी तब फिर उसे फंसाते हैं। हम लोगों ने खाना खाया और मैं आराम करने लगा।

दो बजे रमेश बोला- चल ! बसंती को चोद कर आते हैं !

मेरे मन में रोमा भाभी को चोदने का प्लान चल रहा था। मैंने उससे कहा- यार ! तू जा मुझे बहुत थकान हो रही है ! थोड़ा आराम कर लूं, फिर तुझे तेरी सोना भाभी की भी चूत दिलवानी है, अगर ज्यादा थक गया तो सोना को चोदने का प्लान ख़राब न हो जाए।

रमेश बोला- ठीक है, तू आराम कर ! मैं बसंती को चोद कर आता हूँ।

रमेश बाहर चला गया। रमेश के दोनों बच्चे बाहर खेल रहे थे। रोमा भाभी और मैं अकेले थे। रमेश की बीबी रोमा मेरे कमरे में आई और बोली- भाई साहब ! मुझे एक दिक्कत है अगर आप किसी को नहीं बताएँगे तो मैं आप को बताऊँ !

मैंने कहा- ठीक है, आप बताइए !

रोमा बोली- मुझे रात को नींद नहीं आती है, ऐसा लगता है जैसे कोई मेरी साड़ी उठा रहा हो, एक दो बार यह सोचकर नंगी भी सोई की भूत अब साड़ी कैसे उठाएगा लेकिन तब मुझे एसा लगता है जैसे कोई मेरे टांगें चौड़ी कर रहा है और मेरी चूत चोदना चाहता है। भैया ! मुझे लगता है कोई भूत मुझे तंग कर रहा है, आप मुझे चेक कर के बता दो कि कोई भूत तो मुझ पर नहीं चढ़ा हुआ है।

मेरा लण्ड रोमा की बातें सुनकर उछाल मारने लगा था। मैंने कहा- भाभी भूत चेक तो कर देता हूँ लेकिन आपको जगह-जगह से छूना पड़ेगा, आपको बुरा तो नहीं लगेगा?

रोमा बोली- कैसी बात करते हैं भाईसाहब ! एक तो आप मेरा इलाज करेंगे, ऊपर से मैं बुरा मानूं ! मैं इतनी ख़राब लगती हूँ क्या आपको?

मैं रोमा को देखकर कुछ देर तक सोचने लगा।

रोमा बोली- भाईसाहब आप कुछ कहना चाहते हैं तो कह दीजिए ! और उसने एक कामुक सी अंगड़ाई ली।

मैं समझ गया कि अब लाइन साफ़ है।

मैं बोला- आप साड़ी उतार देंगी तो थोड़ा ठीक से चेक कर लूँगा।

रोमा बोली- बस इतनी सी बात !

और उसने एक झटके में साड़ी उतार दी। अब वो एक लो कट ब्लाउज़ और पेटीकोट मैं मेरे सामने खड़ी थी। मेरा लण्ड पूरा तना हुआ था और चोदने को बेकाबू हो रहा था।

मैं बोला- भाभी जरा मेरी आँखों में आँखे डालो !

उसने मेरी आँखों में आँखे डाल दी। उसकी आँखे बड़ी बड़ी थीं। उसके बाद मैंने रोमा के दोनों गालों पर हाथ फिराया और गाल सहलाने लगा।

कुछ देर बाद गला सहलाते हुआ मेरे हाथ उसकी चूचियों के ऊपर आ गये। ब्लाउज़ के ऊपर से कस-कस कर दो बार मैंने उसकी मोटी मोटी गदराई हुई चूचियां दबा दीं। अपने को थोड़ा कंट्रोल में रखते हुआ मैं अपना हाथ उसके पेट पर फिराते हुऐ पेटीकोट के उपर ले गया और उसकी चूत अपने हाथ से दो तीन बार रगड़ दी।

रोमा गरम हो गई थी, उसने दो-तीन बार उह उह आह की आवाज़ की। थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ हटा लिया। रोमा उतेजित थी उसके मुँह से निकल ही गया- भाईसाहब, भूत भगाइए ना ! बहुत मज़ा आ रहा है।

मैंने भाभी से कहा- भाभी आपके बदन में भूत चिपटा हुआ है, उसे भगाने के लिए आपको नंगा करना पड़ेगा।

रोमा भाभी की चूत गरम हो गई थी, वो बोली- मैं तैयार हूँ !

उन्होंने कहा- हम दोनों बाथरूम में चलते हैं ! रोमा भाभी ने मुझे बताया कि उनके बाथरूम का दरवाज़ा दो कमरों में खुलता है, एक दरवाज़ा जिस कमरे में मैं था उसमें खुलता था दूसरा दरवाज़ा भाभी के बेडरूम में खुलता था। मेरा लण्ड रोमा को चोदने के लिए बेकरार हो रहा था।

रोमा साड़ी उठाकर अपने कमरे की तरफ चली गई। मैं सोच ही रहा था कि बाथरूम से खट खट की आवाज़ आई। रोमा अपने कमरे की तरफ से बाथरूम में आ गई थी। रोमा भाभी बाथरूम से झाँककर बोलीं- आओ, जल्दी अंदर आओ ना !

मैं अब बाथरूम में चला गया। बाथरूम में मैं और रोमा अकेले थे। रोमा बोली- मेरा भूत भगाओ ना !

मैं कुछ घबरा रहा था। मैंने अपने को सँभालते हुए कहा- आप अपने कपड़े तो उतारो !

रोमा इतराते हुए बोली- आप नंगा कर दो न मुझे ! खुद नंगा होने मैं शर्म आ रही है !

मैंने आगे बढ़कर रोमा को अपने बाँहों में भर लिया। अब मेरे होंठ उसके होंठों से चिपक रहे थे। मैं बोला- आज आपके सारे भूत भगा दूंगा !

और हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसने लगे। कुछ देर बाद मैं अलग हुआ और उसके ब्लाउज़ के बटन मैंने खोल दिए। रोमा के दोनों संतरे फड़फड़ा कर बाहर निकल आये। उसकी चूचियां काफी बड़ी बड़ी और तनी हुई थीं, मेरे हाथों में पूरी नहीं आ रही थी। मैंने उन्हें अपने दोनों हाथों से हार्न की तरह बजाना शुरू कर दिया बीच बीच मैं निप्प्ल भी उमेठ रहा था। मेरा लण्ड थोड़ा गीला हो गया था।

रोमा मस्ती में आह ऊह आह ! बड़ा मज़ा आ रहा है ! करके चिल्ला सी रही थी। चुदने को वो बेकरार हो रही थी।

मैंने बाथरूम का नल खोल दिया था ताकि आवाज़ बाहर न जा सके। रोमा पूरी गरम थी, वो मुझसे कहने लगी- भाईसाहब ! थोड़ा चूत पे भी हाथ फेरो ना ! साले भूत को आज मार के ही छोड़ना !

मैं उसके पेटीकोट का नाड़ खोलने लगा। रोमा बोली- भाईसाहब, आप अपने कपड़े भी उतार लो, वरना बाथरूम में ख़राब हो जायेंगे।

मुझे रोमा की बात सही लगी मैंने पहले अपने कपड़े उतार दिए। अब मैं सिर्फ चड्डी में था, मेरा ८ इंच लम्बा लण्ड पूरा तना हुआ चड्डी में से साफ़ दिख रहा था। रोमा भाभी मुस्कराई और बोली- आप का औजार तो बहुत अच्छा दिख रहा है, यह तो गाँव की सभी औरतों की चूत का भूत भगा देगा।

रोमा अब भी पेटीकोट पहने थी। मैंने आगे बढ़ कर उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। पेटीकोट एक झटके से नीचे गिर गया और उसकी चमचमाती हुई चूत अब मेरी आँखों के सामने थी। चूत पूरी चिकनी थी और गीली हो रही थी। मैंने चूत पर हाथ फेर दिया और बोला- रोमा रानी, माल तो तुम्हारा बहुत बढ़िया है।

रोमा बोली- साली को भूत रोज रोज़ तंग करता है, आज इसकी शेव बनाई थी कि रमेश से भूत को पिटवाउँगी लेकिन मुझे क्या पता था कि आज इसका इतना अच्छा दिन है कि आप जैसे भूत भागने वाले से इसका दीदार होगा।

मैं रोमा से पूरा चिपक गया था, मैं बोला- दिन आपका नहीं मेरा अच्छा है कि मुझे आपकी चूत का भूत भागने का काम मिला है।

अब हम एक दूसरे से बुरी तरह से चिपके हुए थे। मैं उसके नरम नरम चूतड़ सहला रहा था। रोमा भी आह ऊह कर रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने अपना अंडरवियर उतार दिया, मेरा ८ इंच लम्बा लण्ड अब रोमा के आगे था। रोमा मेरा लण्ड अपने हाथ में मसल कर बोली- वाह वाह ! कितना अच्छा लण्ड है आपका ! इससे चुदने में तो मज़ा आ जायेगा ! साला आज तो मेरी चूत से चिपके भूत की इससे ऐसी पिटाई होगी कि भूत जिन्दगी भर याद रखेगा !

मैंने रोमा को अपने से चिपका लिया। अब मेरा लण्ड उसकी चूत के मुँह पर टकरा रहा था।

मैंने रोमा को फर्श पर लिटा दिया उसने अपनी टाँगे फैला दी थीं उसकी सुंदर थोड़ी सी फटी हुई चूत मुझे चोदने के लिए उकसा रही थी। मेरा लण्ड लोहे की रॉड की तरह तना हुआ था। रोमा सिसकारी लेते हुआ बोली- मेरे रजा ! अब अपना लण्ड इस कमीनी चूत में डालो ना ! इसको फाड़ो और चोदो ! अब इसे और मत तड़फाओ।

मैंने रोमा की जाँघों के बीच घुटने के बल बैठकर अपने हाथों से उसकी दोनों चूचियां कस कस के पकड़ ली और उन्हें तेजी से दबाने लगा। मेरा लण्ड का सुपाड़ा रोमा की चूत से टकरा रहा था।

मैं चोदने का माहिर था और २०० से ज्यादा औरतों की चूत चोद चुका था इसलिए मैं रोमा को चोदने से पहले थोड़ा और गरम करना चाहता था। मैं रोमा के दोनों स्तनों को मुँह में बारी बारी से चूस रहा था और अपने लण्ड को हिला हिला कर उसकी चूत के मुँह पर फिरा रहा था।

रोमा की आहऽऽ ऊहऽऽ आहऽ आहाऽअ आह बहुत मज़ा आ रहा है ! की आवाजें बाथरूम में गूँज रही थीं। रोमा अब बहुत गरम थी, वो चिल्ला रही थी- राजा थोड़ा अंदर डालो ! मेरे राजा आज बहुत दिन बाद इतना बढ़िया लण्ड मिला है, चोदो न ! देर मत करो !

उसकी चूचियां मैं कस कस कर मसल रहा था। उई आह की आवाज़ से बाथरूम गूँज रहा था। रोमा जो गाँव की शर्मीली भाभी लगती थी, इस समय पूरी गरम थी और अपनी गांड बार बार लण्ड अंदर डलवाने के लिए उचका रही थी। मैंने एक तेज झटका उसकी चूत के मुँह पर मारा, मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में उतर गया।

रोमा ने कस कर मुझे भींच लिया और उसकी आह उह्ह की आवाजें तेज हो गईं। अगले झटके में मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में था। रोमा तेजी से चिल्ला उठी- ऊई ऊई मर गई !

अब मुझे उसकी चूत चोदनी थी।

रोमा की जांघें पकड़ कर मैंने ऊपर उठा दीं। मेरा लण्ड रोमा की चूत में घुसा हुआ था। मैंने धीरे धीरे उसकी चूत में लण्ड आगे पीछे करना शुरू किया। रोमा की बुर बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी। मैंने अपनी चोदने की स्पीड बढ़ा दी।

रोमा की चूचियां आगे पीछे जोर जोर से हिल रही थी। उसके मुँह से ऊई आह आह आह मर गई ! की आवाजें निकल रही थीं। बीच बीच में वो गालियाँ भी बक रही थी। रोमा चिल्ला रही थी- मादरचोद ! चोद कुत्ते ! मार मेरी चूत को ! इसको फाड़ ! बहुत मज़ा आ रहा है तुझसे चुदने में !

मैं बोला- आज तेरी चूत के भूत को फाड़ कर ही छोड़ूंगा !

रोमा बोली- मेरी चूत के राजा ! मेरे को जम के बजा !

इस वक्त मैं उस बहुत तेजी से चोद रहा था। थोड़ा झुककर मैंने उसकी चूचियां दबानी शुरू कर दी और चोदने की स्पीड कम कर दी। रोमा का चुदना जारी था। मैं और रोमा इस समय चुदने का पूरा मज़ा ले रहे थे। सबसे ज्यादा मजा मुझे घरेलू औरतों की चूत पेलने में आता है जो आज मैं पूरा पूरा ले रहा था।

रोमा की चूत मेरे कण्ट्रोल में थी और मैं उसमें कभी धीरे धीरे और कभी तेज तेज धक्के मारते हुए चोद रहा था। रोमा को चोदते हुए मैं उसकी चूचियां भी दबाने लगा। रोमा आह उह आह उह्ह आह आह की आवाज करती हुऐ चुदने का मज़ा ले रही थी।रोमा की चुचियों की घुन्डियाँ मसलते हुए मैंने कहा- क्यों चूत के भूत की पिटाई का मज़ा ले रही हो ?

रोमा बोली- सच राजा ! आज बहुत मज़ा आ रहा है ! तुम मुझे ऐसे ही चोदो और मसलो ! आज मेरी सबसे अच्छी चुदाई का दिन है !

थोड़ी देर बाद मैंने रोमा की चूत में से लण्ड बाहर निकल लिया, रोमा बोली- भाईसाहब और चोदो न ! रमेश अभी नहीं आएगा ! मेरे राजा और चोदो ना ! मैंने कहा- तुम्हारी चूत में जो भूत है उसने मेरे लण्ड को गरम कर दिया है, इसे मुँह में लेकर थोड़ा सा प्यार करो, उसके बाद साले भूत के प्राण निकाल दूंगा।

थोड़ी देर में रोमा भाभी के मुँह में मेरा मोटा लण्ड था। रोमा उसे प्यार से घोड़ी बनकर चूस रही थी। मेरे हाथ भाभी के चूतड़ों को कस कस कर पीट रहे थे। लौड़ा चूसने से बुरी तरह तन गया। अब मैं और भाभी ६९ आसन में थे। उनका चूत रस बहुत तेजी से बह रहा था जिसे मैं लपालप पीने लगा। भाभी मेरा लण्ड फुल मस्त होकर चाट और चूस रही थीं।

मैंने रोमा भाभी को घोड़ी बना दिया और पीछे से उनकी चूत में अपना लौड़ा घुसा दिया और झुककर उनके संतरों को मसलने लगा। रोमा मस्ती में नहा रही थी, पूरा लण्ड उसकी चूत में कस कर घुसा हुआ था। वो बार बार चिल्ला रही थी- भाईसाहब चोदो ! इस कुते को आराम क्यों करा रहे हो !

मैं बोला- तेरे भूत को दबाए हुए है यह !

और मैंने उसकी चुचियों को कस कस कर नोचना जारी रखा। ३-४ मिनट बाद मैंने बहुत तेजी से उसकी चूत चोदना शुरू कर दी। अब वो बहुत तेजी से उई आह उई उई उई ! मर गई ! रोको रोको ! मेरी फट गई ! उई मर गई मर गई ! चिल्ला रही थी। इस तरह वो चिल्लाती रही। ५ मिनट बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया।

उसकी भी चूत से काफी चूत-रस निकला था। इसके साथ ही हम जमीन पर एक दूसरे के ऊपर गिर गए और गहरी गहरी साँसे लेने लगे। रोमा ने मुझे बाँहों में भर लिया और बोली- मेरे प्यारे राकेश ! आज तुमने मुझे बहुत मज़ा दिया !

थोड़ी देर बाद हम सीधे हुए और एक दूसरे को बाँहों में भरकर हमने होंठों में होंठ डालकर एक लम्बा चुम्बन लिया। इसके बाद मैं और रोमा कपड़े पहन कर बाहर आ गए।

रोमा दो कप चाय ले आई, हम एक दूसरे की तरफ मुस्कराते हुए चाय पी रहे थे। रोमा बोली- भाई साहब ! कब जाओगे?

मैं बोला- मैं और रमेश कल सुबह जाएंगे !

रोमा बोली- मेरी चूत का भूत तो आपने भगा दिया लेकिन वायदा करो कि आप रात को एक बार और मुझे चोदेंगे ! जब रमेश सो जायेगा तो मैं बाथरूम में आकर आप से चुदवा लूंगी !

मैं मुस्करा रहा था, रोमा बोले जा रही थी। रोमा बोली- रात में आप मेरी गांड भी एक बार मारना ! मुझे गांड मरवाने में बहुत मज़ा आता है।

रोमा की बात सुन कर मैं हैरान था, मैंने कहा- रमेश तो मुझसे कहता है कि उसने आज तक गांड नहीं मारी !

रोमा ने बताया- रमेश के पीछे बसंती के पति सोहन से चूत और गांड दोनों मरवाती हूँ, लेकिन उसका लण्ड ५ इंच है, वो उसकी चूत उतनी अच्छी नहीं मारता जितनी अच्छी रमेश मारता है। लेकिन सोहन गांड बहुत अच्छी मरता है।

रात को तीन बजे हम दोनों ने सेक्स करने की योजना बना ली और मैंने वायदा किया कि मैं उसकी गांड जरूर मारूंगा।


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सोमवार, 17 अगस्त 2009

भूतोँ का कहर

लेखक:- मिथुन कुमार

उस रात मैँ घर मेँ घर मेँ अकेली थी । पति आँफिस के किसी जरूरी काम से बाहर गये थे ।......जारी